IPC धारा 376 (बलात्कार) से जुड़े मामलों में जमानत और केस की रद्दीकरण (quashing) से संबंधित जानकारी नीचे दी गई है:
1) क्या IPC 376 में जमानत संभव है?
IPC 376 एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है, लेकिन फिर भी कुछ परिस्थितियों में जमानत संभव है, खासकर:
A) अगर FIR में झूठे आरोप हैं
B) दोनों पक्षों में आपसी सहमति से संबंध था
C) मेडिकल या फोरेंसिक सबूत कमजोर हैं
D) पीड़िता की गवाही में विरोधाभास हो
E) आरोपी पहले से निर्दोष छवि का है
कहां मिलती है जमानत?
ज़मानत के लिए पहले सेशन कोर्ट में अप्लाई करना होता है।
रिजेक्ट होने पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की जा सकती है।
2) क्या IPC 376 को रद्द (quash) किया जा सकता है?
हां, लेकिन यह बेहद मुश्किल और संवेदनशील मामला होता है।
High Court CrPC की धारा 482 के तहत FIR को रद्द कर सकता है केवल तब जब:
1) मामला पूरी तरह से झूठा हो
2) शिकायत में गंभीर कानूनी कमी हो
3) दोनों पक्षों में सुलह हो गया हो (हालांकि 376 जैसे गंभीर अपराध में कोर्ट सुलह से FIR रद्द नहीं करता, क्योंकि यह “crime against society” माना जाता है)
लेकिन ध्यान दें:
सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि 376 जैसे अपराधों में सिर्फ आपसी सुलह के आधार पर FIR रद्द नहीं की जा सकती, जब तक कि कोर्ट को लगे कि केस फर्जी है।
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